1994 में ट्रिप्स समझौते को अपनाने के बाद से इस बात पर जोर दिया गया है कि एक मजबूत बौद्धिक संपदा कानूनों के परिणामस्वरूप भारत में अधिक बौद्धिक संपदा का निर्माण होगा। हालांकि, मजबूत बौद्धिक संपदा कानूनों के अपनाने से भारत में अधिक बौद्धिक संपदा का निर्माण नहीं हुआ है। इसका मुख्य कारण यह है कि बौद्धिक संपदा बनाने के लिए बौद्धिक संपदा कानूनों के अलावा और भी तत्वों की जरूरत होती है।

आविष्कारों और नवाचारों की रक्षा के लिए एवं बौद्धिक संपदा बनाने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करने में बौद्धिक संपदा कानून बहुत महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, एक आविष्कारक या एक नवप्रवर्तक के लिए बौद्धिक संपदा कानून उनकी बौद्धिक कृतियों की रक्षा के लिए केवल एक कानूनी साधन है जो की ‘राज्य’ द्वारा प्रदान किया गया जाता है। इसलिए, यदि बौद्धिक संपदा कानून हमारे दिमाग से बनाने के लिए एक प्रोत्साहन हैं, तो स्पष्ट सवाल यह है कि हमारे मन से बौद्धिक संपदा बनाने के लिए क्या आवश्यक तत्व हैं?

बौद्धिक संपदा बनाने के लिए निम्नलिखित आवश्यक तत्व हैं:

1. गहन सोच और बोलने की स्वतंत्रता।

यदि आप सोच नहीं सकते हैं, तो आप कभी भी अपने दिमाग से कुछ भी नहीं बना सकते हैं. सबसे जरूरी है की सोच गहन हो। गहन सोच से हम दायरे से बहार और कुछ हट कर सोच सकते हैं. गहन सोच से हम वो कल्पनाये कर सकते हैं जो और लोग कल्पना करने में चूक जाते हैं. यह बाजार में समस्याओं और अंतराल की पहचान करने और अप्रत्याशित स्थानों या चीजों में मौका ढूंढने में हमे सक्षम भी करती है।

बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी उतना ही महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि आपको एक अलग दृष्टिकोण या राय व्यक्त करने की अनुमति नहीं है, तो कुछ नया बनाने की संभावना लगभग शून्य है।

2. सहानुभूति

सहानुभूति की क्षमता एक आविष्कारक या एक नवप्रवर्तक को बाजार की जरूरतों और आवश्यकताओं को समझने की क्षमता प्रदान करता है इससे पहले कि बाज़ार को अपनी ज़रूतों का एहसास हो।

3. जोखिम और विफलता

आपने मन से एक नया उत्पाद या सेवा बनाने की कोशिश बहुत ज्यादा जोखिम का काम है, और ज्यादातर इसमें विफलता ही प्राप्त होती है। यदि हम विफलता से डरते हैं, तो इस बात की संभावना ज्यादा है की हम कोई कोशिश नहीं करेंगे और अपने दिमाग से कुछ नया नहीं बना पायेंगे।

4. दृढ़ता, धैर्य और विश्वास

एक क्षण में आविष्कार या नवाचार का उत्पादन नहीं होता है। एक विचार को अवधारणा से लेकर अंत तक एक उत्पाद या सेवा बनाने में बहुत लंबा समय लगता है। प्रकाश बल्ब या हवाई जहाज रातोंरात नहीं बनाया गया था। इसके अलावा व्यक्ति को अपने ऊपर सम्पूर्ण विश्वास होना चाहिए की उसकी कड़ी मेहनत और श्रम अपेक्षित परिणाम देगी।